तेलंगाना

ड्रोन तकनीक से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा में सुधार: एम्स-ICMR की पहल से इलाज सस्ता और तेज़

Kavita2
1 July 2026 2:40 PM IST
ड्रोन तकनीक से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा में सुधार: एम्स-ICMR की पहल से इलाज सस्ता और तेज़
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Telangana तेलंगाना: तेलंगाना के यदाद्री-भोंगिर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मॉडल सामने आया है, जिसे पूरे देश में लागू करने योग्य माना जा रहा है। एम्स बीबीनगर और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के शोधकर्ताओं ने ग्रामीण क्लिनिकल हेल्थ नेटवर्क में ड्रोन तकनीक को जोड़कर मरीजों को बड़ा स्वास्थ्य और आर्थिक लाभ पहुंचाया है।

यह क्षेत्र-आधारित परीक्षण ICMR की आई-ड्रोन पहल के तहत किया गया, जिसका उद्देश्य दूरदराज के इलाकों में चिकित्सा सेवाओं की पहुंच को तेज और प्रभावी बनाना है। एक साल तक चले इस मूल्यांकन के परिणाम 2026 में इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ट्यूबरकुलोसिस एंड लंग डिजीज ओपन एंड डिजिटल हेल्थ में प्रकाशित किए गए।

अध्ययन में पाया गया कि ड्रोन के माध्यम से मेडिकल सैंपल और दवाओं की डिलीवरी से न केवल इलाज की गति बढ़ी है, बल्कि मरीजों पर आर्थिक बोझ भी काफी कम हुआ है। शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि यह तकनीक विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का एक प्रभावी माध्यम बन सकती है।

डेटा के अनुसार, इस मॉडल के लागू होने के बाद मरीजों के इलाज से पहले होने वाला औसत आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च (OOP) 9,451 रुपये से घटकर केवल 90.90 रुपये रह गया। यह गिरावट स्वास्थ्य सेवा में लागत कम करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है।

Drone Healthcare, ICMR i-Drone, AIIMS Bibinagar, Rural Health Model,ड्रोन हेल्थकेयर, ICMR आई-ड्रोन, एम्स बीबीनगर, ग्रामीण स्वास्थ्य मॉडल,का कहना है कि ड्रोन तकनीक ने न केवल समय की बचत की है, बल्कि आपातकालीन स्थितियों में दवाओं और जांच के नमूनों को तेजी से पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे मरीजों को समय पर उपचार मिल पा रहा है और गंभीर बीमारियों के जोखिम में कमी आई है।

एम्स बीबीनगर और ICMR की इस पहल को ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को देश के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जाए तो ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार देखा जा सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह मॉडल विशेष रूप से टीबी, लंग डिजीज और अन्य संक्रामक बीमारियों के इलाज में बेहद उपयोगी साबित हो सकता है, जहां समय पर जांच और दवा पहुंचना बेहद जरूरी होता है।

सरकारी और शोध संस्थान इस परियोजना को आगे विस्तार देने की योजना पर भी विचार कर रहे हैं, ताकि इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जा सके।

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